बजट से बदलेगी खेती की तस्वीर

Record procurement has created buffer stock of pulses. (File Photo/ANN)
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बजट से बदलेगी खेती की तस्वीर

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अरुण पांडेय

नवंबर में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया तभी उन्होंने संकेद दे दिया था कि फरवरी में जब उनकी सरकार का सबसे अहम बजट आएगा तो उसमें वो कुछ नया करेंगे और नई लकीर खीचेंगे। बजट को एग्रीकल्चर फोकस करने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता। नोटबंदी से सबसे ज्यादा परेशान रहे किसानों को सहूलियत देने की कोशिश, कृषि प्रधान उत्तर प्रदेश और पंजाब के विधानसभा चुनाव और बचे हुए आधे कार्यकाल में किसानों की दशा सुधारने की कोशिश।

कृषि के लिए 2 लाख करोड़

वित्तमंत्री ने ग्रामीण, कृषि और इससे जुड़े सेक्टर को रिकॉर्ड करीब दो लाख करोड़ रुपए दिए हैं जो पिछले साल के मुकाबले 24 परसेंट ज्यादा है। अरुण जेटली ने यकीन दिलाया है कि उनका यह बजट कृषि का रुख बदलने वाला होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने अब एग्रीकल्चर समेत सभी मंत्रियों से कहा है कि पहली अप्रैल को नया वित्तीय साल शुरू होते ही जोर शोर से काम शुरू कर देना है। वित्तमंत्री का दावा है कि एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए इस तरह की योजनाएं बनाई गई हैं कि किसानों के हाथ में ज्यादा रकम आएगी। किसानों को इस बार शानदार फसल की उम्मीद है और आर्थिक सर्वे के मुताबिक कृषि ग्रोथ 1.2 परसेंट से बढ़कर 4.1 परसेंट हो जाएगी।

वित्तमंत्री ने वादा किया है कि अगले पांच साल यानी 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की पूरी कोशिश की जाएगी। इसके अलावा नोटबंदी की वजह से खेती किसानी की सुस्त रफ्तार में जान फूंकने के लिए बहुत से एलान किए हैं।

खेती की सबसे बड़ी समस्या पानी यानी सिंचाई के लिए सरकार ने जो तत्परता दिखाई है कि उससे निश्चत तौर पर किसानों की उम्मीदें तो बढ़ी होंगी। यही वजह है कि सरकार ने 4.1 परसेंट कृषि विकास दर की उम्मीद जताई है।

सिंचाई

नाबार्ड को सिंचाई के लिए 40 हजार करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है जो कि पिछले साल के बजट से दोगुना है। पिछले साल सिंचाई के लिए नाबार्ड को सिंचाई के लिए 20 हजार करोड़ रुपये देने का ऐलान किया गया था। इसके साथ साथ लघु सिंचाई योजना के तौर पर भी नाबार्ड को 5000 करोड़ रुपये मिलेंगे। सिंचाई पर खर्च बढ़ाने से मॉनसून के ऊपर किसानों की निर्भरता कम होगी और मॉनसून के दगा देने के हालात में भी किसानों की फ़सल खेत में ख़ड़ी रहेगी।

कृषि सेक्टर के तमाम बड़े एक्सपर्ट्स लगातार सिंचाई पर खर्च बढ़ाने की मांग कर रहे थे। क्योंकि  मॉनसून की अनिश्चितता के बीच किसानों के लिए ये सबसे ज़रूरी उपाय माना जाता है। 2009 का सूखा कौन भूल सकता है। जब पूरे देश में खेती को लेकर त्राहिमाम था, खानी पीने की चीजों के दाम आसमान पर पहुंच गए थे। सरकार से लेकर बाज़ार तक में अफरा तफरी का माहौल था। अगर कम से कम सिंचाई के मोर्चे पर किसानों की चिंता दूर कर दी जाए तो महंगाई के मोर्चे पर भी सरकार की बहुत हद तक चिंता दूर हो जाएगी।

आंकड़ों में कृषि बजट

Ø गांव, कृषि और संबंधित सेक्टर-  1.87 लाख करोड़ रु

Ø ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) – 48,000 करोड़ रु

Ø नाबार्ड फंड-  40,000 करोड़ रु

Ø प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना-  9000 करोड़ रु

Ø कृषि ऋण का लक्ष्य-  10 लाख करोड़ रु

Ø नाबार्ड का लघु सिंचाई फंड- 5000 करोड़ रु

Ø नाबार्ड का डेयर प्रोसेसिंग फंड- 8000 करोड़

Ø लघु फसल ऋण (7% ब्याज पर)-  3 लाख रु

Ø समय पर भुगतान पर ब्याज छूट-  3 परसेंट

Ø गांवों में मकान के लिए 2 लाख रु कर्ज पर ब्याज छूट- 3 परसेंट

Ø सहकारी बैंक से लिए गए कर्ज पर 60 दिनों की ब्याज छूट

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इस साल किसानों के लिए रिकॉर्ड 10 लाख करोड़ कृषि कर्ज देने का ऐलान किया है। पिछले बजट में 9 लाख करोड़ का कृषि लोन का प्रावधान किया गया था। किसानों को कृषि लोन पर 60 दिन की ब्याज पर छूट देने का प्रावधान भी किया गया है। वित्त मंत्री ने एक बार फि दोहराया है कि 5 साल साल में किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए सरकार हर संभव प्रयास करेगी। लोन पर करीब 15 हजार करोड़ ब्याज सब्सिडी का भी प्रावधान है। लेकिन सरकार के सामने इसके गलत इस्तेमाल को रोकना एक बड़ी चुनौती है। कुछ लोग इस योजना के तहत 4 से 7 परसेंट पर लोन लेकर उसी बैंकों से 6 से 8 परसेंट तक का ब्याज कमाते हैं,जिससे खेती पर ये खर्च नहीं हो पाता है।

फसल बीमा

फसल बीमा का दायरा 30 परसेंट से बढ़ाकर 40 परसेंट कर दिया गया है। फसल बीमा योजना के लिए 9 हजार करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया है। पिछले बजट में पांच हजार पांच सौ रुपये का प्रावधान किया गया था। हालांकि कुछ एग्रीकल्चर एक्सपर्ट्स का मानना है कि फसल बीमा के लिए और रकम की जरुरत है। कम से चार से पांच हजार करोड़ रुपये की और व्यव्सथा की जानी चाहिए।

सॉयल हेल्थ

वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि सॉयल हेल्थ का दायरा बढ़ाया जाएगा। देश के 648 कृषि विज्ञान केंद्रों में मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब खोले जाएंगे। पिछले साल बड़े पैमाने पर किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड देने का फैसला किया गया था।

ई-मंडी

2017-18 में देश की कुल 585 मंडियों को ऑनलाइन जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 250 मंडियों को ऑनलाइन जोड़ने का काम पूरा हो गया है। मंडियों के अपग्रेडेशन के लए 75 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। ये भी कहा गया है कि फ्यूचर और स्पॉट मार्केट को जोड़ने के लिए पॉलिसी बनाई जाएगी। अगर ऐसा होता है कि किसानों को सस्ते भाव पर अपना उत्पाद बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा। बाज़ार में पारदर्शिता आएगी।

डेयरी और पशुपालन

डेयरी प्रोसेसिंग, इंफ्रा डेवलपमेंट के लिए 8000 करोड़ रुपये दिया गया है। इसके तहत कई मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट खोली जाएंगी। 63 हजार प्राइमरी एग्रीकल्चर सोसाइटी को कोर बैंकिंग से जोड़ा जाएगा। इसके लिए तीन साल का वक्त तय गया है। इसमें 1900 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

 एग्री सोसाइटी और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग

कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग पर मॉडल लॉ राज्यों को भेजा जाएगा। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में आदर्श कानून बनाने के प्रस्ताव से कृषि में ज्यादा निवेश आएगा और कॉरपोरेट सेक्टर की भी भागीदारी बढ़ेगी। इससे दलालों की भूमिका भी खत्म करने में मदद मिलेगी और फसल की पूरी की पूरी कीमत किसानों के हिस्से जाएगी।

एग्रीकल्चर सेक्टर में बड़ा सुधार करते हुए राज्यों से कहा गया है कि वो एपीएमसी एक्ट से कृषि उत्पाद को हटा दें, जो सड़ गल जाते हैं। इससे इससे किसान खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें अपना उत्पाद किसे और कब बेचना है। इसके अलावा प्रोसेसिंग इकाइयों और फ्रूड और सब्जियों के प्रोडक्शन के बीच तालमेल बैठाने का प्रस्ताव है। इससे किसानों को अपने उत्पाद की सही कीमत मिलेगी और नुकसान होने का खतरा भी नहीं रहेगा।

मनरेगा

मनरेगा में रिकॉर्ड 48,000 करोड़ रुपए आवंटन से ग्रामीण इकोनॉमी में ग्रोथ आने की उम्मीद। इससे किसान परिवारों की आय बढ़ेगी। साथ ही मनरेगा के तहत तलाब, गोबर खाद के लिए गड्डे जैसे काम कराए जाएंगे इससे उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

 कुल मिलाकार खेती के लिए से ये बजट रिफॉर्म वाला बजट दिख रहा है। इसमें खेती की तस्वीर स्थायी रूप से बदलने पर फोकस  किया गया है। लेकिन अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती ये होगी कि जो ऐलान किये गए हैं… उसे ग्राउंड पर भी उसी गंभीरता से लागू कराया जाए और जो लिकेज है उसे पूरी तरह से बंद किया जाए… तभी 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा हो पाएगा।

बजट एग्रीकल्चर के लिए कुछ अहम बातें

 

1.  किसानों की आय अगले 5 साल में दोगुनी करने का लक्ष्य

2.   छोटे और मझौले किसानों को मौके बेमौके आसान कर्ज देने के लिए सभी एग्रीकल्चर सोसाइटी को डिजिटल करने का लक्ष्य

3.  पर ड्रॉप, मोर क्रॉप नाम से लघु सिंचाई योजना के लिए 5000 करोड़ का फंड इससे किसानों को पानी की सहूलियत के मुताबिक फसल चुनने में मदद मिलेगी और उनकी कमाई बढ़ेगी।

4. मनरेगा में रिकॉर्ड 48,000 करोड़ रुपए आवंटन से ग्रामीण इकोनॉमी में ग्रोथ आने की उम्मीद। इससे किसान परिवारों की आय बढ़ेगी

5.  मनरेगा के तहत तलाब, गोबर खाद के लिए गड्डे जैसे काम कराए जाएंगे इससे उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी

6.  ई-मंडी का दायरा बढ़ाने के लिए हर मंडी को सफाई, छंटनी और ग्रेडिंग के लिए 75 लाख रुपए मिलेंगे

7.  किसानों के फायदा पहुंचाने के लिए ई-मंडी का दायरा 250 से बढ़ाकर 585 एपीएमसी करने का लक्ष्य

8.एग्रीकल्चर सेक्टर में बड़ा सुधार करते हुए राज्यों से कहा गया है कि वो एपीएमसी एक्ट से कृषि उत्पाद को हटा दें, जो सड़ गल जाते हैं। इससे इससे किसान खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें अपना उत्पाद किसे और कब बेचना है

9. प्रोसेसिंग इकाइयों और फ्रूड और सब्जियों के प्रोडक्शन के बीच तालमेल बैठाने से किसानों को अपने उत्पाद की सही कीमत मिलेगी और नुकसान होने का खतरा भी नहीं रहेगा।

10. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में आदर्श कानून बनाने के प्रस्ताव से कृषि में ज्यादा निवेश आएगा और कॉरपोरेट सेक्टर की भी भागीदारी बढ़ेगी। इससे दलालों की भूमिका भी खत्म करने में मदद मिलेगी और फसल की पूरी की पूरी कीमत किसानों के हिस्से जाएगी।

11.  कृषि लोन के लिए रिकॉर्ड 10 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा गया है। पिछले बजट में यह 9 लाख करोड़ रुपए था।

12. प्राकृतिक आपदा से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए फसल बीमा योजना का कवरेज कुल फसल के 30 परसेंट से 40 परसेंट किया जा रहा है। इसे अगले साल 50 परसेंट करने का प्रस्ताव है।

13.  फसल बीमा योजना काफी सफल रही है और एक साल में योजना के तहत इंश्योरेंस कवर दोगुना होकर 1.40 लाख करोड़ हो गया है।

14.  प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाले लोन पर सब्सिडी स्कीम अब 15 से बढ़ाकर 20 साल कर दी गई है। इससे किसानों को मुश्किल हालात से निपटने में सहूलियत होगी।